जेपी चौधरी:आधुनिक कुशवाहा समाज का पिता
कुशवाहा समाज का एकीकरण करने का प्रथम प्रयास 1891 में मंवंत कोइरी जी ने किया था,मंवंत कोइरी जी मूल रूप से बंगाल के निवासी थे,जिनका कार्यक्षेत्र बिहार तथा बंगाल का क्षेत्र बना,कालान्तर में इस एकीकरण को आगे बढ़ाने का प्रयास पंडित जेपी चौधरी (कुशवाहा) जिनको आधुनिक कुशवाहा समाज का पिता कहा जा सकता हे।उनके पहल से राजा माता प्रसाद वर्मा जी, चुनार के राजा अर्जुनदेव जी तथा हरि प्रसाद वैष्णव जी आदि के सहयोग से 1912 में मिर्ज़ापुर, उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय कुशवाहा क्षत्रिय महासभा का स्थापना हुआ, बिहार में जितने भी कुश वंशियों को एकत्रित किया गया, सभी को कुशवाहा जाति में मिला लिया गया,उसी समय कुर्मी तथा यादव में भी चेतना का विकास हो रहा था। कुशवंशियों में दांगी गोत्र वाले अपने को कुशवाहा जाति के शेष गोत्र वाले लोगों से अपने को श्रेष्ठ समझते थे। आज भी वे लोग अपने को श्रेष्ठ ही तथा कुशवंशियों से अलग समझते हैं। उन्हीं दांगी लोगों में जगदेव दांगी एक प्रसिद्ध तथाकथित समाज सुधारक हुआ, जिसने अपने गोत्र के लोगों को शेष कुशवाहा लोगों से तो अलग रखा, लेकिन अपना राजनीति चमकाने के लिए कुशवाहा समाज का नेता बना। कुशवाहा जाति के एकीकरण का इन्हीं दागियों का एक गुट विरोध कर रहा था, लेकिन उस समय राजा माता प्रसाद वर्मा जी, राजा अर्जुनदेव जी तथा जयपुर राजघराना के समर्थन होने के कारण दांगी लोगों का एक भी नहीं चला।वैसे अंग्रेजो के आने से पहले बिहार के जमींदार तो कुशवाहा ही तथा एक नंबर विकसित जाति थे।
जगदेव नामक एक दांगी जो ठान ही लिया था कुशवाहा को कमजोर करके ही दांगी को मजबूत किया जा सकता है, उसने एक बात का खूब प्रचार करवाया की दांगी सभी कुशवाहा से उपर है।ये जगदेव दांगी का ही प्रचार किया हुआ है।फिर जगदेव ने बडकी दांगी और छोटकी दांगी के बीच विभाजन करवाया,अब हर जगह ये कुशवाहा समाज को भ्रमित करने लगा। जब कुशवाहा समाज के लोग विकास कर रहे थे तथा शिक्षित बन रहे थे,तो जगदेव दांगी ने कुशवाहा समाज को माओ का शिक्षा देने लगा, किताब के बजाय उसने बन्दुक पर जोड देने लगा,धीरे धीरे कुशवाहा समाज में इसने नकारात्मकता का भाव भर दिया।अखिल भारतीय कुशवाहा क्षत्रिय महासभा से इसने क्षत्रिय शब्द हटवाया, जिससे इसे अनुसूचित जाति को बग़ल में बैठा सके, जगदेव ने अपने गोत्र वालों के लिए दांगी क्षत्रिय महासभा बनाया।खुद में क्षत्रिय शब्द लगवाया तथा शेष कुशवाहा लोगों में क्षत्रिय शब्द को हटवा दिया,1964 में कुछ दिनों के लिए कुशवाहा समाज से बिहार के मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह बने, इन सतीश जी को मुख्यमंत्री के पद से हटवाने में जगदेव दांगी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसीलिए हमारे समाज के आदर्श जेपी चौधरी जी है,न कि जगदेव दांगी। कुछ दिनों बाद उसने माली,फूले,ज्योतिराव फूले, ज्योतोबाबाई फूले ये नया बवाल चालू कर दिया, जिनका कुशवाहा समाज का कोई संबंध नहीं है।