भविष्य पुराण में लिखा हैः-
कच्छवाही कुशावाही कच्छीनाम युतांस्तथा । एतेहि क्षत्रियाः शुद्धाः शुद्धाचार परायणाः ।
अर्थः-कच्छवाही कुशावाही और काच्छी नाम युक्त जातियें शुद्ध क्षत्रिय हैं और शुद्धाचार परयण हैं इसका भावार्थ यह है कि कुश से चला हुआ वंश गुजरात प्रान्त में कच्छी च राजपूताना युक्त प्रदेश व विहार आदि आदि देशों में काछी कहाता है जो शुद्ध क्षत्रिय वंशज व आचार विचार युक्त सदाचार परायण हैं।
*भविष्य पुराण में कुशवाहा जाति का उल्लेख
कच्छुवाहारी कुषवाहाचारी कच्छीनाम युतास्तथा।
प्राचीये लूनियाः शुद्धाः शुद्धाचार परायणाः ॥
यह संदर्भ "भविष्य पुराण" (प्रत्येकाख्यान भाग) से लिया गया है।
इसमें विभिन्न जातियों, कुलों और उनके प्रादेशिक निवास का उल्लेख मिलता है।
🔹 श्लोक में “कच्छुवाहारी”, “कुशवाहाचारी” तथा “कच्छी” नाम से संबद्ध जातियों का वर्णन है।
🔹 “प्राचीये लूनियाः शुद्धाः” से तात्पर्य पूर्व दिशा (बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश) में रहने वाले लोग हैं।
🔹 यहाँ जातीय पहचान और उनके आचरण का उल्लेख वर्णनात्मक शैली में मिलता है।