अगर हम ठानलें तो, अम्बर पे तिरंगा फहरा देगें
हम कुशवंश के योद्धा है, दिन में तारे दिखला देगें
कुशवाहों के दुश्मन तो, बिन मौत मर जाते है
अपना मान जो गले लगाते, वह आंगे बढ़ जाते है
हम दिखने में भोरे है, पल भर में गदर मचा देगें
हम कुशवंश के योद्धा है, दिन में तारे दिखला देगें
चन्द्रगुप्त और चित्रांगत ने, कुशवंश में जन्म लिया
गुरु नानक जीने भी, कुशवंशी होने पर गर्व किया
हमें गर गुस्सा आ गया तो, आसमान झुका देगें
हम कुशवंश के योद्धा है, दिन में तारे दिखला देगें
नरवरगढ़ के राजा नल के, किस्से सभी सुनाते है
शांति का पाठ पढ़ाने, बुध्द भी कुशवंश में आते है
हम गिनती में इतने है की, सारा देश हिला देगें
हम कुशवंश के योद्धा है, दिन में तारे दिखला देगें
काछी कोईरी मुराव आदि, कुशवाहा कहलाते है
कुशवाहा मौर्य शाक्य सैनी, सूर्यवंश में आते हैं
हम रखते पन्ना कोरे है, नया इतिहास लिखा देगें
हम कुशवंश के छोरे है, दिन में तारे दिखला देगें
लेखक
मुनीम सिंह कुशवाहा ग्राम बिनवारा जिला निवाड़ी मध्य प्रदेश 9584283313