विद्याभानु शास्त्री का पक्ष था कि कोयरी जाति के अंदर आने वाले #जरूहार (जलुहार कोयरी) शाखावाले 'यजुर्हार ब्राह्मण' हैं तथा #कुशवाहा_क्षत्रिय होने पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया।
इसपर पंडित जेपी चौधरी जी ने 'कुश' के अस्तित्व तथा कोयरियों के कुशवाहा क्षत्रिय होने के अनेकों प्रमाण प्रस्तुत किए। अंत मे इस शास्त्रार्थ मे जेपी चौधरी जी #विजयी हुए और विद्याभानु शास्त्री की घोर पराजय हुई।
इस शास्त्रार्थ का पूर्ण विवरण 22 जुलाई 1933 ई. को पत्रिका 'कुशवाहा क्षत्रिय मित्र' मे पृष्ठ संख्या-10 से 12 तक प्रकाशित हुआ था।
#kushlekh
#aiku
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